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जोधपुर एवम् जैसलमेर की ओर -

  • लेखक की तस्वीर: Shashi Prabha
    Shashi Prabha
  • 4 दिन पहले
  • 3 मिनट पठन

अपडेट करने की तारीख: 16 घंटे पहले

 मेहरानगढ़ दुर्ग
मेहरानगढ़ दुर्ग

मेहरानगढ़ दुर्ग का निर्माण 15वीं शताब्दी के मध्य में हुआ। राजपूतों के राठौड़ वंश में  जोधा राव ने मेहरानगढ़ दुर्ग के निर्माण की नींव डाली । एशिया के सबसे ऊंचे  दुर्गों में मेहरानगढ़ दुर्ग की गिनती होती है। मेहरानगढ़ दुर्ग जमीन से 400 फीट ऊंचाई पर स्थित है । राठौर के देवता भगवान सूर्य को मेहरानगढ़ दुर्ग अर्पित है । मेहरान का अर्थ सूर्य होता है ।

मेहरान गढ़ दुर्ग मारवाड़ के राजाओं की शान रहा है।


मेहरानगढ़  दुर्ग स्थापत्य का  नायाब   नमूना है।



मेहरानगढ़ दुर्ग की शान तोपें 




पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति 

माना जाता है कि मेहरानगढ़ दुर्ग की जब नींव बनाई जा रही थी तब वह बार-बार गिर जाती थी। तब दुर्ग की दीवार के साथ बाहर की तरफ पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित किया गया था।

दुर्ग के अंदर ' स्पाइरल स्टेयर्स (जीना) बहुत खूबसूरत बना हुआ है। यह आपस में ' स्क्रू  - बोल्ट ' के द्वारा जोड़ा गया है। इस जीने को ब्रिटेन से बनवा कर मंगवाया गया था।


ब्लू सिटी जोधपुर की ब्लू गलियां -

दीवारों पर बहुत सुंदर पेंटिंग की गई है । ब्लू दरवाजे,ब्लू दीवारों पर खूबसूरत पेंटिंग मन को लुभाने वाली है ,लेकिन इस प्रकार की ब्लू गलियां अभी थोड़ा कम बची है, मेहरानगढ़ दुर्ग के बाहर ढलान पर बसी, संकीर्ण मोहल्ले में ये देखी जा सकती हैं,लेकिन इन गलियों में साफ सफाई का कोई विशेष ध्यान नहीं रखा गया है ।



मेहरानगढ़ दुर्ग के पास बावड़ी 



' उम्मेद भवन ' 

उम्मेद भवन 'लाइव फोर्ट 'इसका एक हिस्सा ताज होटल ग्रुप को दिया हुआ है । भवन का रखरखाव, उम्मेद भवन तक पहुंचने वाली सड़के  देखने लायक है,बहुत साफ सुथरी एकदम दुरुस्त स्थिति में.... मन को बहुत अच्छा लगा ।



जोधपुर घूमने के बाद हम जैसलमेर की ओर निकले जैसलमेर में रुकने की बहुत अच्छी व्यवस्था थी। 



जैसलमेर का नक्शा एक' मिनी इंडिया' का आभास देता है ।

जैसलमेर का दुर्ग भी 'लाइव फोर्ट ' है। दुर्ग के अंदर आम जनता रहती है जिनको मालिकाना हक राजा के द्वारा सर्टिफिकेट इश्यू करके दे दिए गए हैं। 

जैसलमेर का दुर्ग छोटा है। 

यहां पर रानी के द्वारा प्रथम बार जोहर जो किया गया था,उस स्थान को मैंने देखा। दुर्ग के प्रवेश द्वार के बाहर जोहर के  सांकेतिक चिन्ह बने हुए हैं। जैसलमेर दुर्ग के इतिहास अढाई (2.5 ) सांकों का वर्णन आता है। 

1294 में अलाउद्दीन खिलजी के समय में । 1326में फिरोजशाह तुगलक के समय में और 16वी शताब्दी में अमीर अली के हमले के दौरान साके हुए । 

अमीर अली के बारे में कहा जाता है कि अमीर अली ने जैसलमेर के राजा के साथ मित्रता की और उनका विश्वास जीत लिया उनसे इच्छा जाहिर की जब आपके यहां विवाह हो तब आप लोगों की विवाह की पूरी रस्में मेरी बेगमें में देखना चाहती है। जैसलमेर राजा तैयार हो गए बेटे की बारात लेकर के चले और अमीर अली को कहला दिया कि उनकी बेगमें वैवाहिक रस्मो -रिवाज को देख सकती हैं । अमीर अली तो मौके की तलाश में था  अमीर अली ने पालकियों में स्त्रियों के वेश में पुरुषों को बैठाया और किले पर हमला बोल दिया । जब राजा को पता लगा कि उसके साथ धोखा हुआ है, वह वापस लौटा तलवारों से अपनी रानियों ,स्त्रियों  ,बच्चियों के गले काट डाले गए । पुरुषों ने केसरिया बाना पहना स्त्रियों को सा के का मौका नहीं देकर खुद ही उनके गले काट डाले गए तो यह अर्ध साका कहलाता है।


 पटवों की हवेली -

ये सम्पन्न ,मजबूत आर्थिक स्थिति के लोग थे उनकी हवेलियां की स्थापत्य कला देखते ही बनती है।




जैसलमेर दुर्ग के 850 वर्ष पूरा होने पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। तत्कालीन राज्यपाल माननीय प्रतिभा पाटिल द्वारा एक 'पिलर इनस्क्रिप्शन ' का उद्घाटन हुआ ।



जैसलमेर में सूर्यास्त देखते ही बनता था।




जैसलमेर में सूर्योदय भी देखने लायक था। 




जैसलमेर की सैंड ड्यून्स में हम सभी ने पूरा आनंद लिया।




जैसलमेर के थार डेजर्ट को हमने बहुत एंजॉय किया ।


जैसलमेर की सेम सैंड ड्यून्स में हमने जीप सफारी का आनन्द लिया।




सभी लोगों ने ऊंट की सवारी का भी आनंद लिया ।



जैसलमेर में रात्रि सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने लायक था ।



कुलधारा (भूतिया ,)गांव 

'हॉन्टेड विलेज 'के भी दर्शन किए। बड़ा दुखद महसूस हुआ कि कैसे एक भरा पूरा गांव एक ही रात में उजड़ गया,एक ही रात में पूरे गांव के निवासियों को गांव छोड़ने के लिए बाध्य होना पड़ा ।


जैसलमेर से वापसी 

यह इंडिगो एयरलाइंस की स्ट्राइक का पहला दिन था इस दिन लगभग 250 इंडिगो फ्लाइट्स कैंसिल हुई थी लेकिन भगवान का धन्यवाद कुछ घंटे इंतजार करने के बाद हमारी फ्लाइट की रवानगी दिल्ली के लिए हो गई। 

राजस्थान भू क्षेत्र में हिंदुस्तान का सबसे बड़ा राज्य है तो इसको  कई किस्तों में घूमना होगा , अभी तो राजस्थान घूमने की शुरुआत है थोड़ा-थोड़ा टुकड़ों में घूमते रहेंगे ब्लॉक के माध्यम से आपको शेयर करते रहूंगी फिर मिलते हैं राजस्थान को लेकर।


नमस्कार ।

 
 
 

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