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राजस्थान डायरी

  • लेखक की तस्वीर: Shashi Prabha
    Shashi Prabha
  • 28 जन॰
  • 2 मिनट पठन

परिवार के साथ राजस्थान में जयपुर, जोधपुर और जैसलमेर भ्रमण -


 सन 2014 में भाभी एवम् उनके पुत्र और पुत्रवधू के साथ  जयपुर भ्रमण के लिए निकले थी । इस दौरान आमेर किला,जयगढ़  नाहर गढ़  , हवा महल, सिटी पैलेस आदि घूमे थे प्रोग्राम सिर्फ दो दिन का था तीसरे दिन वापस आना था इसलिए इस दौरान जितना घूम सकते थे घूमे। कान्हा भक्त,मीरा बाई जी के मंदिर का दर्शन कर ने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हो सकाथा।


मीरा बाई जी के मंदिर के दर्शन की प्रबल इच्छा मुझे पुनः जयपुर खींच लाई । इस बार मैं अपने पुत्र , पुत्रवधू एवंपौत्र के साथ जयपुर घूमने गई । फिर से वही सब ऐतिहासिक स्थल आमेर किला, जयगढ़ , नाहरगढ़ फोर्ट ,जंतर मंतर आदि घूमे । 


आमेर किला देखने से पहले ही मैने अपने गाइड से मीरा बाई जी के मंदिर दर्शन की इच्छा व्यक्त की थी। गाइड ने मुझे मंदिर दर्शन कराने को पूर्णतया आश्वस्त किया।

किला देखने के बाद हमने मन्दिर दर्शन किए।

इस मन्दिर को जगत शिरोमणि मंदिर भी कहते हैं दर्शन के समय मैंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने का असफल प्रयास किया। आंसू थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।

मन्दिर में  जो गिरिधर गोपाल की मूर्ति है उसको  राजा मानसिंह चित्तौड़गढ़ (मेवाड़)के मंदिर से लेकर आए थे जिसकी पूजा मीरा बाई जी करती थीं। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद राजा मानसिंह मेवाड़ से इस मूर्ति को सम्मान पूर्वक लाए थे पूर्वक ताकि अकबर की सेना के आक्रमण के समय मूर्ति के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचे। साथ ही राजा मानसिंह के 16वर्षीय पुत्र जगत सिंहकी मृत्यु के पश्चात उनकी रानी ने मन्दिर निर्माण की इच्छा व्यक्त की थी ताकि उनके पुत्र की याद चिरकाल तक बनी रहे। मन्दिर में भगवान श्री कृष्ण की इस मूर्ति के साथ ही मीराबाई जी की मूर्ति भी स्थापित की गई है।







परिवार के साथ थी तो कुछ खरीददारी भी होनी ही थी ,  तो जोहरी बाजार ,बापू मार्केट  पुरोहित का कतला आदि भी घूमे । मेरा पौत्र चूंकि अभी छोटा है तो उसको  ट्रेन से सफर करने का अवसर नहीं मिला था । कार से या बाय एयर तो कई बार सफर कर चुका था लेकिन ट्रेन से सफर करने की उसकी काफी इच्छा थी तो जयपुर भ्रमण के दौरान उसकी इच्छा पूरी हुई और मेट्रो से उसको जयपुर घुमाया गया। बच्चे की  प्रसन्नता देखने लायक थी ,बालमन प्रसन्नता से हिलोरे ले रहा था।


जयपुर दर्शन के पश्चात हम चौथे दिन देहरादून वापस लौट आए।

 
 
 

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