ए आई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)
- Shashi Prabha
- 7 मिनट पहले
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ए आई,(आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)आज की जरूरत है,ऐसा मानकर इस पर काम किया जाना चाहिए। ए आई व्यक्ति की प्रतिभा को अभूतपूर्व तरीकों से बढ़ा सकता है ।
जब लोगों से ए आई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बारे में चर्चा होती है तो कुछ लोगों का मानना है कि तकनीक तो अच्छी है लेकिन इस पर अत्यधिक निर्भरता नुकसानदायक है माना की हर क्षेत्र में हर परिस्थिति में हर प्रश्न का जवाब ए आई के पास है, हर समस्या का समाधान ए आई के पास है , लेकिन व्यक्ति की तर्कशक्ति,शोध की प्रवृत्ति , रचनात्मक और अभिव्यक्ति को यह सीमित भी करता है ।
आज का युवा ए आई को लेकर काफी रोमांचित है । मुझे तो ऐसा लगता है कि मित्रों के साथ लगने वाली महफिल को भी ए आई सीमित कर देगा क्योंकि ए आई स्वयं एक अच्छा मित्र साबित हो रहा है।
यहां पर यह भी शंका की जा सकती है की ए आई लोगों की नौकरी खा जाएगा लेकिन ऐसा नहीं है यह सोचना गलत है ।
क्योंकि जिस समय भारत में कंप्यूटर क्रांति आई तब उसके बारे में भी यही धारणा थी कि कंप्यूटर लोगों को बेरोजगार कर देगा , लोगों की नौकरी छीन लेगा , लेकिन ऐसा नहीं हुआ । नई टेक्नोलॉजी के साथ बहुत सी नौकरियां ईजाद हुई परिणाम हमारे सामने है ।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अर्थपूर्ण एवं सकारात्मक पहलुओं पर बात की जानी चाहिए , ऐसा भारत के द्वारा महसूस किया जाने लगा। इस पर चर्चा करने के लिए नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'ए आई इंपेक्ट समिट ' आमंत्रित की गई।
इस समिट में लगभग 80देशों ने भाग लिया। ए आई एक्जीविशन में काफी अच्छे सॉल्यूशन आए । यहां पर एक तथ्य आपको बताते चलें, वह यह कि एग्जीबिटर्स ने बताया कि भारत में 'मेड इन इंडिया रोबो डॉग ' पहले ही बन चुका है। भारत में जबरदस्त इनोवेशन हो रहे हैं।
ए आई समिट में हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्पष्ट किया कि भारत को ए आई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भय नहीं बल्कि भाग्य और भविष्य दिखाई देता है क्योंकि हमारे पास प्रतिभा है,ऊर्जा है ,क्षमता है और नीति स्तर पर स्पष्टता है। यह तीनों ही ए आई के लिए आवश्यक है ।
मोदी जी ने स्पष्ट किया कि भारत में विविधता है आबादी है और लोकतंत्र भी है ऐसे में भारत में जो ए आई मॉडल सफल होगा उसे वैश्विक स्तर पर तैनात किया जा सकता है । मोदी जी ने समिट में टैक दिग्गजों से कहा कि वे भारत में ए आई मॉडल को डिजाइन करने एवं विकसित करने का काम करें और फिर दुनिया में उसे लागू करें साथ ही दुनिया से भी मोदी जी ने ए आई को वैश्विक अच्छाई के रूप में लेने की अपील की ।
ए आई इंपैक्ट समिट में लगभग 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने 'नई दिल्ली घोषणा पत्र' पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता " 'सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय 'का संदेश विश्व को देता है यद्यपि यह समझौता बाध्यकारी नहीं है यानि की गैर बाध्यकारी समझौता है। यह ए आई को मात्र कुछ तकनीकी रूप से बलशाली महाशक्तियों तक ही सीमित नहीं करता है बल्कि विश्व के विकास के लिए एक 'साझा रोड मैप 'तैयार करता है। 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय '(सबका कल्याण,सब का सुख) के सिद्धांत से प्रेरित है और इस उद्देश्य की वकालत करता है कि ए आई के लाभों को पूरी मानवता के साथ बिना किसी भेदभाव के बराबर के स्तर पर साझा किया जाना चाहिए ।"



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