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श्री अयोध्या धाम

लेखक की तस्वीर: Shashi Prabha
Shashi Prabha
17 मई
3 मिनट पठन

श्री अयोध्या धाम 


परिवार के साथ अभी कुछ समय पूर्व श्री किए जाएं । अयोध्या धाम भारतीय  राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ा प्रसंग है । भारत की बहुसंख्यक आबादी की आस्था का प्रतीक है ।


इतिहास का विद्यार्थी होने के नाते श्री अयोध्या धाम के दर्शन की प्रबल इच्छा के साथ  अयोध्या जाने का प्रयास बार-बार होता रहा ।


सन 1526 में जब बाबर ने भारत पर आक्रमण किया तब  श्री रामलला की जन्म भूमि अयोध्या में श्री रामलला के मंदिर को तोड़कर उस पर बाबरी मस्जिद बना दी गई  । यह आक्रमणकारी आक्रांतों की युद्ध नीति में शामिल था। बाबर को अगर मस्जिद बनानी ही थी तो अयोध्या में बाकी स्थान पर बनाया जा सकता था लेकिन क्योंकि आक्रमणकारी बाबर ने भारतीय आस्था को रौंदने के लिए  रामलला  जन्म स्थान को चुना एवम् उसको बाबरी मस्जिद में रूपांतरित कर दिया गया ।  


यह भारतवर्ष के बहुसंख्यकों  की आस्था पर एक करारी चौट थी ।

रामलला जन्म भूमि को मुक्त कराने के लिए तभी से प्रयास शुरू हो गए जब यह भूमि आक्रांताओं के कैद में आई । विभिन्न राजाओं के द्वारा , साधुओं के द्वारा आम जनता के द्वारा रामजन्म भूमि को  मुक्त कराने के लिए न जाने कितनी बार प्रयास किए गए , कितने लोगों ने अपने प्राणों  का बलिदान दिया ।


अंततः 22 जनवरी 2024 को रामलला (श्री राम का बाल रूप)की प्राण प्रतिष्ठा की गई । और एक बार फिर से भारत की आस्था  में  प्राण फूंक दिए  गए ।लोग अपने लला श्री राम से मिलने को बेचैन हो गए। मैं भी अपने इसी जन्म में श्री रामलला के दर्शन करना चाहती थी ।

 श्री राम लला ने निमंत्रण भेजा और पारिवारिक सदस्यों के साथ श्री राम लला की जन्मभूमि श्री अयोध्या जी धाम के दर्शन करने का एक छोटा ट्रिप बनाया गया । मेरठ से वंदे भारत एक्सप्रेस  पकड़ी और श्री अयोध्या धाम पहुंच गए ।

अयोध्या धाम का प्लेटफार्म



श्री अयोध्या धाम का प्लेटफार्म देखकर आंखें भर आई । कैसा महसूस हुआ यह शब्दों में बताना संभव नहीं है , यह शब्दों में स्पष्ट नहीं किया जा सकता है । प्लेटफार्म  का दृश्य विहंगम था ....यह श्री राम की  उपस्थिति दर्ज़ करा रहा था । 

रामसेतु निर्माण की गिलहरी भी यहां उपस्थित थी -



बहरहाल अयोध्या पहुंचते ही श्री राम लला के दर्शन के लिए हम निकल गए । चूंकि सप्ताह के मध्य में गए थे वीकेंड नहीं था तो आसानी से श्री राम लला के दर्शन हो गए । लगभग 5 से 7 मिनट हम श्रीराम लला के सामने हाथ जोड़ अभिवादन की मुद्रा में खड़े रहे ऐसा लगा जैसा बहुत प्यारा बच्चा कहीं कैद था जो अब स्वतंत्र  हुआ है ,मन कर रहा था कि  श्री रामलला से लिपट जाऊं , श्री राम लला के मुख मंडल पर आंखें स्थिर   हो गई । हाथ जुड़े हुए थे.... कोई भावों  का उतार चढ़ाव नहीं था ..... मुझे लग रहा था कि मैं राम लला से बोल रही हूं 'आखिर लला आप आ ही गए हैं,  इस जन्म में दर्शन हो ही गए हैं आपके.'...इतना अद्भुत पल .... बहुत ही सुंदर । रामलला के दर्शन अभीभूत करने वाले थे । 

श्री हनुमान गढ़ी के दर्शन -


मान्यता है की श्री राम लला के दर्शन करने से पूर्व श्री हनुमान जी के दर्शन किए जाते हैं लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं हो पाया,हमने पहले रामलला के दर्शन किए और अब हनुमानगढ़ी में हनुमान जी के दर्शन करने की बारी थी। बहुत भारी भीड़ थी, बड़ी लंबी लाइन थी लेकिन श्री राम भक्त हनुमान जी की कृपा से हमारा नंबर जल्दी ही आ गया और अंजनी पुत्र श्री हनुमान जी के दर्शन कर हम  कृतार्थ हुए ।


कनक महल -



कनक महल अपने नाम के अनुरूप ही बहुत सुंदर महल है इसमें श्री राम और मां सीता जी सोने का मुकुट पहने हुए हैं। यहां हमने आरती में भजनों का आनन्द लिया।

दशरथ महल -



 यह चक्रवर्ती राजा दशरथ का महल है यहां राजा दशरथ अपने परिवार के साथ विराजमान है ।


श्री सरयू जी -

इतिहास की साक्षी रही सरयू जी को देखकर मन गदगद हो गया। हमने सरयू जी का आशीर्वाद लिया -


अगली सुबह सरयू नमस्कार के बाद श्री राम लला के दर्शन करने हम पुनः पहुंच गए ,मन कर रहा था वहीं रह जाऊं ....बहुत सुंदर ....अतुल्य.... शब्दों से परे राम की महिमा ,राम लला की महिमा।


लता मंगेशकर चौक -



यहां पर रखी वीणा बहुत खूबसूरत है यहां पर बहुत मधुर आवाज में लता मंगेशकर के गाने कानों में शहद घोलते नजर आते हैं।

रामपथ एवम् धर्मपथ -



यह सब बहुत ही अभिभूत करने वाला रहा है। 

और अब श्री अयोध्या जी से हमारी वापस लौटने की बारी थी। श्री अयोध्या धाम का दर्शन एक सपनों का संसार सा महसूस हो रहा था .….. श्री अयोध्या धाम स्टेशन के प्लेटफार्म पर बैठे हम वापसी में भी प्लेटफार्म की खूबसूरती और सुविधाजनक रुप को देखकर गदगद हो रहे थे। 

जय श्री अयोध्या जी 🙏


 
 
 

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