धनुषकोड़ी
- Shashi Prabha
- 26 जन॰
- 3 मिनट पठन
अपडेट करने की तारीख: 27 जन॰
धनुष्कोड़ी-
धनुषकोडी को धनुष्कोटी या धनुषकोडी भी कहा जाता है ।यह तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में रामेश्वरम दीप के दक्षिण पूर्वी कोने में स्थित है । यहां से श्रीलंका की दूरी 20 किलोमीटर के लगभग है । सन 1964 में रामेश्वर चक्रवात में धनुष्कोड़ी नगर ध्वस्त हो गया था । मंदिर ,मकान ,रेलवे स्टेशन, यात्रियों से भरी हुई ट्रेन सब समुद्र में समा गए थे । तब से धनुष कोटी नगर वीरान पड़ा है शाम होते-होते टूरिस्ट लोग यहां से चले जाते हैं।
मां सीता का अपहरण श्रीलंका नरेश रावण के द्वारा किया गया । सीता जी को लौटाने के सन्दर्भ में रावण को समझाने के जब सारे प्रयास असफल हो गए तब श्रीलंका पर चढ़ाई करने का श्री रामचंद्र जी के दल द्वारा मन बनाया गया, लेकिन रास्ते की समस्या थी ,कोई सेतु नहीं था । समुद्र देव से याचना करके रास्ता देने का प्रयास किया गया अन्ततः समुद्र देव द्वारा सेतु बनाने के लिए रास्ता दे दिया गया। भगवान राम की सेना के दो प्रमुख इंजीनियर नल और नील के द्वारा यह सेतु बनाया गया । श्री राम की सेना ने इसी सेतु द्वारा श्री लंका में प्रवेश किया । मां सीता को सम्मान वापस लाया गया । युद्ध हुआ लंका नरेश रावण मृत्यु को प्राप्त हुए । विभीषण को नया राजा बनाया गया ।
विभीषण का राज्याभिषेक करने के बाद जब भगवान राम वापस लौटने लगे तब विभीषण ने श्री राम से अनुरोध किया कि इस सेतु को अपने धनुष की कोड़ी के द्वारा तोड़ दिया जाए अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कोई भी श्रीलंका में कभी भी प्रवेश कर सकता है ।श्रीलंका की संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए इस सेतु का टोडा जाना जरूरी है ऐसा सोचकर भगवान राम ने अपनी धनुष की कोड़ी से श्रीलंका की संप्रभुता की खातिर इस सेतु को तोड़ दिया। धनुष्कोड़ी आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है यहां का नजारा बहुत खूबसूरत है । हिंद महासागर बंगाल की खाड़ी धनुषकोडी को घेरे हुए हैं । समुद्र का पानी धनुषकोडी में एकदम स्वच्छ बहुत खूबसूरत नीला दिखाई देता है । यहां का प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक शांत वातावरण मन मोहने में पर्याप्त है । राम सेतु एक ऐतिहासिक सत्य है इसको कल्पना का नाम नहीं दिया जा सकता है सेटेलाइट के द्वारा यह आज भी दिखाई देता है
धनुषकोडी को धनुष्कोटी या धनुषकोडी भी कहा जाता है ।यह तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में रामेश्वरम दीप के दक्षिण पूर्वी कोने में स्थित है । यहां से श्रीलंका की दूरी 20 किलोमीटर के लगभग है । सन 1964 में रामेश्वर चक्रवात में धनुष्कोड़ी नगर ध्वस्त हो गया था । मंदिर ,मकान ,रेलवे स्टेशन, यात्रियों से भरी हुई ट्रेन सब समुद्र में समा गए थे । तब से धनुष कोटी नगर वीरान पड़ा है शाम होते-होते टूरिस्ट लोग यहां से चले जाते हैं।
मां सीता का अपहरण श्रीलंका नरेश रावण के द्वारा किया गया । सीता जी को लौटाने के सन्दर्भ में रावण को समझाने के जब सारे प्रयास असफल हो गए तब श्रीलंका पर चढ़ाई करने का श्री रामचंद्र जी के दल द्वारा मन बनाया गया, लेकिन रास्ते की समस्या थी ,कोई सेतु नहीं था । समुद्र देव से याचना करके रास्ता देने का प्रयास किया गया अन्ततः समुद्र देव द्वारा सेतु बनाने के लिए रास्ता दे दिया गया। भगवान राम की सेना के दो प्रमुख इंजीनियर नल और नील के द्वारा यह सेतु बनाया गया । श्री राम की सेना ने इसी सेतु द्वारा श्री लंका में प्रवेश किया । मां सीता को सम्मान वापस लाया गया । युद्ध हुआ लंका नरेश रावण मृत्यु को प्राप्त हुए । विभीषण को नया राजा बनाया गया ।
विभीषण का राज्याभिषेक करने के बाद जब भगवान राम वापस लौटने लगे तब विभीषण ने श्री राम से अनुरोध किया कि इस सेतु को अपने धनुष की कोड़ी के द्वारा तोड़ दिया जाए अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो कोई भी श्रीलंका में कभी भी प्रवेश कर सकता है ।श्रीलंका की संप्रभुता को सुरक्षित रखने के लिए इस सेतु का टोडा जाना जरूरी है ऐसा सोचकर भगवान राम ने अपनी धनुष की कोड़ी से श्रीलंका की संप्रभुता की खातिर इस सेतु को तोड़ दिया। धनुष्कोड़ी आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है यहां का नजारा बहुत खूबसूरत है । हिंद महासागर बंगाल की खाड़ी धनुषकोडी को घेरे हुए हैं । समुद्र का पानी धनुषकोडी में एकदम स्वच्छ बहुत खूबसूरत नीला दिखाई देता है । यहां का प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक शांत वातावरण मन मोहने में पर्याप्त है । राम सेतु एक ऐतिहासिक सत्य है इसको कल्पना का नाम नहीं दिया जा सकता है सेटेलाइट के द्वारा यह आज भी दिखाई देता है।




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