
साउथ इंडियन डायरी - अपनी मित्रों के साथ दक्षिण भारत का आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक भ्रमण
- Shashi Prabha
- 25 जन॰
- 2 मिनट पठन
तमिलनाडु के मदुरै शहर में यह हिंदू मंदिर है । यह माता पार्वती का मंदिर है । इस मंदिर को मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर भी कहते हैं । यहां पर देवी पार्वती जी की मीनाक्षी और भगवान शिव की सुंदरेश्वर के रूप में पूजा की जाती है ।यह सुंदर मंदिर है । यह मंदिर अपनी दिव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है । इसमें सुंदर गोपुरम हैं । खूबसूरत स्तंभों वाले कॉरिडोर, जिनपर अति सुंदर नक्काशी है । इसमें 14 विशाल गोपुरम है और यह लगभग 17 एकड़ में फैला हुआ है ।
मंदिर के अंदर भगवान शिव की नटराज मुद्रा की एक सुंदर मूर्ति है जहां भगवान शिव ने अपना दायां पैर उठाया हुआ है( जिसे वैली अंबालम कहते हैं) आजकल मंदिर में रिनोवेशन का कार्य चल रहा है मंदिर पर ग्रीन कलर की जाली डाली हुई है बाहर से तो मंदिर के भव्यता नहीं देख पाए लेकिन मंदिर का गलियारा , मंदिर में मूर्तियां , मंदिर की भव्यता मन मोहने वाली है।
जब मंदिर दर्शन की लाईन में लगे थे तब वहां अचानक से , शायद मंदिर की व्यवस्था से जुड़ा मां का एक भक्त बड़ी ही तीव्रता से ताजे पत्तों में लिपटा एक दम गरमा गर्म कुछ वितरित करने लगा , पहले तो मुझे कुछ समझ नहीं आया कि मैं वह दौना लूं या नहीं, क्योंकि वह वितरित सबको नहीं किया जा रहा था, लेने के लिए हाथ आगे बढ़ा ने वालों को वह भक्त बीच बीच में डांटता भी जा रहा था,फिर कुछ पल सोच कर मैंने भी अपना दायां हाथ आगे बढ़ा दिया । मैंने वह दौना कुछ मिनट तक अपने पास ऐसे ही रखा , खोला नहीं। लेकिन जब मैंने देखा बाकी लोग खा रहे हैं तब मैंने भी वह दौना खोला। उसमें एकदम गरमा गर्म अति स्वादिष्ट मसालेदार खिचड़ी थी। इतनी स्वादिष्ट खिचड़ी मैंने अपने जीवन में अब तक नहीं खाई थी। खिचड़ी खाते हुए मुझे तेजी से हिचकियां लगी मेरी मित्र नीरज ने मुझे पानी पिलाया खिचड़ी का स्वाद शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।
कुछ कुछ दूरी पर पानी की व्यवस्था भी थी जो बड़ी सराहनीय लगी। दर्शन की पंक्ति में कोई गरीब, कोई अमीर, कोई छोटा, कोई बड़ा,कोई ब्राह्मण, कोई वैश्य, कोई यादव नहीं था ,थे तो सिर्फ मीनाक्षी अम्मन के भक्त .... श्रद्धा भाव के साथ ।




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